ज्ञानियांचा सखा
मी लिहितो मला सुचेल ते..तुम्ही वाचा जे रुचेल ते!!
Saturday, January 8, 2011
इंतज़ार
जब अन्जान थे उनसे बात करने का इंतज़ार रहा,
जब पहचान हुई उनसे इजहार करने का इंतज़ार रहा,
प्यार करके भी इजहार न कर पाए ये हमारी गलती थी,
अब दूर गए वो हमसे तो उन्हें भूल पाने का इंतज़ार रहा.
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